
क्रिकेट ने तो अभी तक सिर्फ एशियाई मुल्क को ही निकम्मा बनाया था, लेकिन अब लगता है पूरी दुनिया ही निकम्मी हो जाएगी। क्रिकेट के पीछे अभी तक तो सिर्फ हम..हमारा पड़ोसी पाकिस्तान...बांग्लादेश और श्रीलंका ही भागा करते थे..लेकिन अब चीन..अमेरिका..जर्मनी और जापान की टीमें भी क्रिकेट के चौके-छक्के के पीछे भागते हुए दिखाई देगी। वर्ल्ड कप...चैंपियंस ट्रॉफी जैसे बड़े आयोजन के बाद जब आईपीएल का क्रिकेट का नया अवतार हुआ तो क्रिकेट का साख भी बढ़ी और लोकप्रियता भी...लेकिन साथ ही सवाल भी उठा कि क्या क्रिकेट की आड़ में दूसरे खेल तबाह तो नहीं हो रहे ...। जवाब मिला हो या नहीं ... ये तो पता नहीं... लेकिन अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक काउंसिल ने जब से क्रिकेट को ग्रीन स्गिनल दिखाई है..तब से ये बहस जिंदा जरूर हो गई है । ओलंपिक की अहमियत इसलिए अभी तक सबसे ज्यादा है क्योंकि ... स्टेमिना .. कुशलता और धैर्य का इसी आयोजन (ओलंपिक) में सबसे बड़ा इम्तिहान होता है... इस आयोजन में कई ऐसी स्पर्धा शामिल होती है...जो विश्व में या तो लोकप्रिय नहीं है ... या फिर काफी पिछड़ी है।
क्रिकेट फिलहाल सबसे लोकप्रिय खेल है...और जाहिर है अगर ओलंपिक में इसकी इंट्री होगी तो वो इंटरटेन करने के मामले में बाकि सारे खेलों को दबा देगा। अभी तक ओलंपिक में सिर्फ 26 खेल में 30 वर्ग के 300 स्पर्धाएं ही आयोजित होती थी... लेकिन 2016 में रियो डि जेनारियो में होने वाले ओलंपिक में दो खेल और बढ़ जाएंगे...क्योंकि इस ओलंपिक के लिए आयोजन समिति में गोल्फ और रग्बी को मंजूरी दे दी है। लेकिन 2020 ओलंपिक में खेलों की संख्या और भी बढ़ जाएगी...क्योंकि आयोजन समिति ने इस वर्ष के ओलंपिक में क्रिकेट के साथ-साथ क्लाइम्बिंग के साथ-साथ पावर बोटिंग को भी शामिल कर लिया है। सवाल ना रग्बी.. ना गोल्फ.. ना पावर बोटिंग और ना तो क्लाइम्बिंग को ओलंपिक में शामिल करने पर है.. सवाल है तो क्रिकेट पर ...सवाल नहीं डर है..... डर इस बात का.... कि कहीं क्रिकेट का बुखार पूरी दुनिया को ही अपनी चपेट में ना ले ले..... क्रिकेट में मैडल जीतने के चक्कर में अमेरिका.. रुस..और जर्मनी जैसी विश्व की टॉप मेडलिस्ट टीम दूसरे खेल से अपना ध्यान भटकाकर सिर्फ क्रिकेट के पीछे ही ना भागने लगे। ऐसे देखा जाए तो क्रिकेट को ओलंपिक में शामिल करना हमारे लिए ख़ुशख़बरी ही है...क्योंकि अगर ओलंपिक में क्रिकेट को शामिल किया गया तो भारत की टीम ही गोल्ड मैडल की प्रबल दावेदार होगी। साफ है कि क्रिकेटरों के लिए और एशियाई देश के लिए भले ही ओलंपिक समिति का फैसला एक ख़ुशख़बरी हो....लेकिन बाकी खेलों के लिए ये अच्छी ख़बर बिल्कुल भी नहीं हैं।