सोमवार, 17 मई 2010

कहां तक ..... कब तक !



सवाल...संशय और ख़ौफ़ ! नक्सली के खूनी खेल से रक्तरंजित हुई दंतेवाड़ा की जमीं पर जिस किसी की भी निगाह जा रही है...ये तीनों बातें उसके ज़ेहन में कौंध रही है...सवाल इस बात का ... कि आखिर कब तक नक्सल का नासूर बेगुनाहों का खून पीता रहेगा... संशय इस बात का ... कि आखिर सरकार की नींदें कहां और कितनी शहादत के बाद खुलेगी....और ख़ौफ़ इस बात का....कि क्या हम वास्तव में सुरक्षित हैं?। इन कौंधते सवालों के सिलसिलों के बीच हर दिन बेगुनाहों की जान जा रही है...मासूमों की चीखें .... चीत्कारें.... जिस किसी की भी कानों में सुनाई पड़ रही है...उसका सीना पसीज रहा है...लेकिन पता नहीं क्यों ? छत्तीसगढ़ की जनता के रहनुमा बनने का दंभ भरने वाली रमन सरकार का सीना कौन से पत्थर का बना हुआ है...जो इन मासूमों के जख्म को महसूस कर पा रही है और ना हीं बेगुनाहों की चीखों को सुन पा रही है। आज जवानों के हाथ नक्सलियों के खात्मे के लिए मचल रहे हैं... जनता भी जान जोखिम में डालकर नक्सलियों के खिलाफ मोर्चा लेने के लिए तैयार बैठी है...तो फिर हमारी सरकारें क्यों नामर्दी दिखा रही है...क्यों सरकार ये नहीं कह पा रही....!!!! बस अब बहुत हो गया...अब होगी आर पार की लड़ाई। दंतेवाड़ा में पिछले महीने 76 सीआरपीएफ जवानों की मौत के बाद एक बार फिर करीब 40 बेगुनाह नक्सलियों का शिकार बन गए। घटना के बाद केंद्र सरकार ने फिर से अपना रोना रोया... और राज्य सरकार ने अपनी बेबसी बताई.... लेकिन मौत का सिलसिला जारी है और सरकार की नामर्दी से ये सिलसिला आगे भी चलता रहेगा। । हर दिन बढ़ते मौत के ग्राफ को देख दुख भी होता और आश्चर्य भी....लेकिन सच कहूं इन सबों से इतर शर्म भी आती है...! दुख होता है ... बेगुनाहों की लाश देखकर...आश्चर्य होता है सरकार की कार्यप्रणाली को देखकर और शर्म आती है सरकार की नपुंसकता को देखकर। क्या सरकार को लोगों की जान की परवाह नहीं...या फिर सरकार ने बर्दाश्त की हद को लाखों बेगुनाहों की मौत तक तय कर रखी है। सच कहूं ! अगर इतनी सारी मौत के बदले केवल एक नेता या मंत्री हादसे का शिकार हो जाता तो...तुरंत सरकार कार्रवाई करने को तैयार हो जाती .... शायद सरकार की नजर में मंत्री की मौत का मोल आम लोगों की मौत के मोल से ज्यादा होता । पता नहीं सरकारें ये क्यों सोचती ? कि मौत के बाद जितना दुख खास लोगों के परिवारों को होता है... उतना ही दुख आम लोगों और गरीब लोगों के परिवारों को भी होता है... सोई सरकार अब तक जाग जाओं ... क्या उनका काम अब बस घटना का इंतजार करना... मौत पर अफसोस जताना और मुआवजे का ऐलान करने का ही रह गया।

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